शिया कॉलेज, बजाज़ा, लखनऊ स्थित सईदुल मिल्लत हॉल में सरकार-ए-ख़तीब-ए-अकबर मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अथर साहब एवं सरकार-ए-ख़तीबुल इरफ़ान मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अशफ़ाक़ साहब के देसे की मजलिस का इनइक़ाद हुआ, जिसे हुज्जतुल इस्लाम जनाब मौलाना क़मर हसनैन साहब (ईरान कल्चर हाउस, नई दिल्ली) ने ख़िताब फ़रमाया।
मजलिस का आग़ाज़ क़ारी नदीम नजफ़ी ने तिलावत-ए-कलामे पाक से किया। इसके बाद शोअरा-ए-किराम में मंज़र भोपाली, एजाज़ ज़ैदी, फ़रीद मुस्तफ़ा और हसन फ़राज़ ने बारगाह-ए-इमाम हुसैन (अ.स.) में अपना मंज़ूम नज़राना-ए-अक़ीदत पेश किया।

मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना क़मर हसनैन ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की तालीमात, सीरत और उनकी अज़ीम क़ुर्बानी पर रौशनी डाली। उन्होंने कहा कि इंसान की सबसे बड़ी दौलत उसका बेहतर अमल है। अगर कोई शख़्स बेअमल और बेदीन है तो महज़ मुसलमान कहलाने से उसे कोई फ़ायदा नहीं होगा और उसके आमाल बेकार साबित होंगे। मौलाना ने कहा कि कर्बला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) को शहीद करने वाले किसी दूसरे मज़हब के लोग नहीं थे, बल्कि रसूल-ए-ख़ुदा (स.अ.व.) का कलमा पढ़ने वाले नामनिहाद मुसलमान थे, जो ज़ाहिर में मुसलमान और बातिन में शैतान के पैरौकार थे।
उन्होंने कहा कि आज भी उसी फ़िक्र के कुछ लोग यज़ीद लईन को “रज़ियल्लाह” कहकर उसका दिफ़ा करने की कोशिश करते हैं, मगर जिस तरह किसी कुत्ते को बार-बार नहलाने से वह पाक नहीं हो सकता, उसी तरह यज़ीद को “रज़ियल्लाह” कह देने से उस पर अल्लाह की लानत और अज़ाब में कोई कमी नहीं आएगी।
मजलिस में शिया हुसैनी फ़ंड के सेक्रेटरी हसन मेहदी झब्बू की जानिब से आए हुए मोमिनीन के लिए सबील-ए-इमाम हुसैन (अ.स.) का एहतिमाम किया गया।
मजलिस में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सदर हुज्जतुल इस्लाम मौलाना साइम मेहदी, तंजीमुल मकातिब के जनरल सेक्रेटरी हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सफ़ी हैदर, प्रिंसिपल मौलाना फ़िरोज़ अली, मदरसा ए जामेअतुत तब्लीग़ से मौलाना जाफ़र अब्बास, मौलाना रज़ा अब्बास, मौलाना ज़मीन जाफ़री नजफ़ी, शाही इमाम टीले वाली मस्जिद मौलाना फ़ज़्लुल मन्नान, मौलाना अनवर हुसैन रिज़वी, मौलाना मोहम्मद मुस्लिम, मौलाना मुम्ताज़ जाफ़र नक़वी, मौलाना ग़ुलाम मेंहदी मौलाई, मौलाना क़िरत नक़वी, मौलाना शाहिद हुसैन, मौलाना दानिश अब्बास हल्लौरी, मौलाना मूसा रिज़वी, मौलाना हसन अकबर रन्नो, मौलाना तफ़्सीर हसन, मौलाना शाहीन नक़वी, मौलाना कुमैल अब्बास रिज़वी, शिया कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. शबीहे रज़ा बाक़री इदारा-ए-तहफ़्फ़ुज़-ए-अज़ा के जनरल सेक्रेटरी नुसरत हुसैन लाला, इमरान अख़्तर भोले, राजू रिज़वी, सीनियर सहाफ़ी ज़हीर मुस्तफ़ा, प्रिंस इक़बाल मिर्ज़ा, शिया क़ौमी तंज़ीम हैदरी टास्क फोर्स के ओहदेदारान समेत बड़ी तादाद में उलेमा-ए-किराम, ख़ुतबा, वाइज़ीन, ज़ाकिरीन, असातिज़ा, तलबा, अंजुमन हाए मातमी के ज़िम्मेदारान व अराकीन और कसीर तादाद में मोमिनीन मौजूद रहे।
मजलिस के इख़्तिताम पर ख़ानवादाए ख़तीबे अकबर कि जानिब से मौलाना एजाज़ अतहर, मौलाना यासूब अब्बास, प्रोफेसर मिर्ज़ा मोहम्मद अबू तय्यब, फ़िरोज़ अब्बास, डॉ० मीसम मुबारक, ने आए हुए तमाम मोमिनीन का शुक्रिया अदा किया जिसके बाद मोमिनीन ने मरहूम ख़तीब-ए-अकबर मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अथर साहब एवं ख़तीबुल इरफ़ान मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अशफ़ाक़ साहब के लिए सुरह अल फातेहा से इसाले सवाब किया और मुल्क व मिल्लत की सलामती, अम्न-ओ-अमान लिए ख़ुसूसी दुआ की गई।
इसी सिलसिले में ख़ानवादाए ख़तीबे अकबर कि जानिब से अवध प्वाइंट नक्ख़ास लखनऊ में हुज्जतुल इस्लाम जनाब मौलाना क़मर हसनैन साहब (ईरान कल्चर हाउस, नई दिल्ली) के दस्ते मुबारक से तारीख़वार कैलेंडर का रस्म-ए-इजरा किया गया जिसमें मौलाना यासूब अब्बास, मौलाना एजाज़ अतहर, फ़िरोज़ अब्बास, सय्यद अब्बास शिराज़ी, यूशा अब्बास और मुअज़्ज़िज़ हज़रात मौजूद रहे।

