(सत्ता की शान) 25 मार्च अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग के 26वें दिन पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर ईरान ने साफ इनकार कर दिया है.। तेहरान ने इस्लामाबाद को मजबूत संदेश भेजते हुए कहा कि पाकिस्तान के जरिए बातचीत की कोई संभावना नहीं है और ईरान ट्रंप की 15 सूत्रीय योजना या किसी भी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं कर रहा.ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बागई और संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ कोई सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही. उन्होंने ट्रंप के दावों को फेक न्यूजश् बताया और कहा कि यह सिर्फ तेल बाजार को प्रभावित करने और जंग के दलदल से निकलने की कोशिश है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीजफायर का आफर तो भेजा है. लेकिन ईरानी सेना ने ट्रंप को मजाक उड़ाया है और कहा है कि तुम्हारे जैसे व्यक्ति कभी समझौता नहीं करेगा. मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सच और झूठ के बीच की लकीर धुंधली होती जा रही है. एक तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान के साथ ष्प्रोडक्टिवष् बातचीत हो चुकी है और जल्द जंग खत्म हो सकती है. दूसरी तरफ ईरान के बड़े नेता इन दावों को पूरी तरह नकार रहे हैं यही वजह है कि इस जंग में अब सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि नैरेटिव की भी लड़ाई चल रही है. हर पक्ष अपनी कहानी गढ़ रहा है, जिससे आम लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो गया है कि आखिर सच्चाई क्या है.हालांकि अमेरिका की बातों पर भरोसा करन ऐसा है जैसे अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना ईरान की हमलों को लेकर अमेरिका-इजरायल काफी परेशान है ईरान पे हमला करना दोनों की गले की हडडी बन चुका है अमेरिका-इजरायल ने ईरान को गाजा जैसा कमजोर समझ लिया था और उसी घोके मे गच्चा खा गये एक ओर डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर प्रस्ताव और शांति प्रयासों की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सेना अपनी सबसे प्रभावशाली और तेज प्रतिक्रिया देने वाली यूनिट्स में से एक 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 1,000 सैनिकों को क्षेत्र में भेजने की योजना बना रही है। सैनिकों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आ रही हैं, लेकिन न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार यह टुकड़ी आने वाले कुछ ही दिनों में मिडल ईस्ट के लिए रवाना हो सकती है। 82वीं एयरबोर्न डिवीजन को अमेरिकी सेना की इमरजेंसी रिस्पांस फोर्स माना जाता है, क्योंकि इसकी विशेषता है कि इसे बहुत कम समय में दुनिया के किसी भी हिस्से में तैनात किया जा सकता है। इस मिशन में प्रथम ब्रिगेड काम्बैट टीम के साथ डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल ब्रैंडन टेग्टमेयर भी शामिल रहेंगे। यह यूनिट तेज कार्रवाई, त्वरित तैनाती और संकट की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता के लिए जानी जाती है।
इजराइल को ईरान हमले में बनाया गाजा जैसा. पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर ईरान का साफ इनकार
