जान-बूझकर रोजा तोड़ना हराम है और उसको तीनों कफ्फारों में से कोई एक कफ्फारा अदा करना होगा।मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी

5 रमजान 23 फरवरी 2026
कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक़ हुसैनी षीराज़ी से जारी षिया हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रष्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी ने दिए-
नोट- महिलाओं के लिए हेल्प लाइन षुरू की गयी है जिस मे महिलाओं केप्रष्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 6386897124
षिया हेल्प लाइन में तमाम मराजए के मुकल्लदीन के दीनी मसायल जानने के लिए स्ुाबह 10 -12 बजे तक 9415580936- 9839097407 इस नम्बर पर संपर्क करें। एवं ईमेलः उंेंमस786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।

सवाल-अगर कोई दमे का मरीज रोजे की हालत में इनहेलर का इस्तेमाल करता है तो क्या हुक्म है?
जवाब- इनहेलर से निकलने वाली दवा अगर खाने-पीने की नली में नहीं जाती है तो रोजा सही है।
सवाल-अगर कोई शखस अपने घर से 30 किलोमीटर के सफर पर नौकरी करने जाता है तो उसके रोजे के लिए शरीयत ने क्या बयान किया है?
जवाब-ऐसा इंसान जो रोज 30 किलोमीटर का सफर करता है, वह रोजा रख सकता है।
सवाल-अगर कोई आदमी सुबह की अजान के बाद ऐसी हालत में उठे कि उस पर गुस्ल वाजिब हो, तो क्या वह रोजा रख सकता है?
जवाब-ऐसे इंसान का रोजा सही है, मगर गुस्ल करे फिर उसके बाद सुबह की नमाज अदा करे।
सवाल-अगर कोई शखस रोजे की नीयत करे और दिन के किसी हिस्से में जान-बूझकर रोजा तोड़ दे तो क्या हुक्म है?
जवाब-जान-बूझकर रोजा तोड़ना हराम है और उसको तीनों कफ्फारों में से कोई एक कफ्फारा अदा करना होगा।
सवाल-अगर कोई बीमार हो और वह जोहर से पहले ठीक हो जाए तो क्या रोजा रखना सही होगा?
जवाब-अगर उस शखस ने कोई ऐसा काम नहीं किया है जो रोजे को टूट करता है, तो नीयत करके रोजा रख ले, उसका रोजा सही होगा।