वक़्फ़ संपत्तियों की हिफाज़त और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे की कामयाबी के लिए यौम-ए-दुआ मनाया गया

प्रेस विज्ञप्ति
लखनऊ वक़्फ़ संपत्तियों की हिफाज़त और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे की कामयाबी के लिए यौम-ए-दुआ मनाया गया

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की अपील पर देशभर के मुसलमानों ने इस शुक्रवार को “यौम-ए-दुआ” यानी दुआ का दिन के रूप में मनाया। यह दिन वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा और वक़्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे की कामयाबी के लिए मनाया गया।

जामा मस्जिद ईदगाह, लखनऊ में जुमा की नमाज़ से पहले दिए गए खुतबे (उपदेश) में मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली साहब ने कहा कि वक़्फ़ इस्लाम का एक अहम हिस्सा है, जिसका ज़िक्र कुरआन में भी मिलता है। उन्होंने बताया कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम, उनके साथियों और अन्य मुसलमानों ने अपनी ज़मीनें और संपत्तियाँ अल्लाह के नाम पर वक़्फ़ की थीं।

मौलाना ने आगे कहा कि भारत का संविधान धार्मिक आज़ादी की गारंटी देता है, जो अनुच्छेद 25 और 26 में दर्ज है। ये अनुच्छेद धार्मिक संस्थानों और इबादतगाहों को चलाने का अधिकार देते हैं। उन्होंने बताया कि AIMPLB ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें यह बताया गया है कि संशोधन अधिनियम की कई धाराएँ संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 25 और 26 के खिलाफ हैं।
उन्होंने बताया कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, और हाल ही में आए अंतरिम आदेश में कुछ राहत मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतिम फैसले में देश की सर्वोच्च अदालत मुस्लिम समुदाय के साथ पूरा इंसाफ़ करेगी। जुमा की नमाज़ के बाद उत्तर प्रदेश सहित देशभर की मस्जिदों में इस मुकदमे की सफलता के लिए ख़ास दुआएँ की गईं।