प्रेस विज्ञप्ति:
इमामबाड़ा जन्नत मआब सैयद तकी साहब अकबरी गेट लखनऊ में अशरए मुहर्रम की चौथी मजलिस को मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी साहब ने “अहलेबैत नजात का रास्ता” के विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि अहलेबैत अलैहिस्सलाम की मिसाल उस कश्ति की तरह है जो लोगों के लिए निजात का रास्ता प्रदान करती है,और बुराई से निकालकर अच्छाई की ओर ले आती है।
इसीलिए खुदावंद आलम ने पैगंबर की जिंदगी में ही ग़दीर के मैदान में अली अलैहिस्सलाम की विलायत का एलान करवा कर यह इंतजाम कर दिया कि रसूल के बाद इमामत का सिलसिला जारी रहे, ताकि कयामत तक लोग गुमराही से निजात पाते रहें। लेकिन रसूल-ए-इस्लाम के दुनिया से जाने के बाद कुछ तथाकथित मुसलमानों ने अहलेबैत अलैहिस्सलाम को छोड़ दिया और अपने पसंद के खलीफा बनाकर खुदा और रसूल की मुखालिफत की, जिसका नतीजा यह हुआ कि वे गुमराही में चले गए।
आज भी अगर मुसलमान गुमराही से निकलना चाहता है, तो उसे अहलेबैत के दर पर आना होगा और उनकी सीरत, उनके किरदार को अपनाना होगा।अगर हम वास्तविक नजात चाहते हैं, तो हमें अहलेबैत के नक्शे कदम पर चलना होगा। उनकी शिक्षाओं को अपनी जिंदगी में व्यावहारिक रूप से लाना होगा, क्योंकि यही वह हस्तियाँ हैं जो दुनिया में हिदायत करने वाले हैं और आखिरत में नजात का साधन हैं।
अंत में मौलाना ने हज़रत हबीब इब्न मुज़ाहिर का कोफा से करबला में आकर इमाम पर अपनी जान कुर्बान करने का मसाइब बयान किया, जिसे सुनकर अज़ादारों ने ग़म और मातम किया।
अहलेबैत नजात का रास्ता-मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी
