7 रमजान 25 फरवरी 2026
कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक़ हुसैनी षीराज़ी से जारी षिया हेल्प लाइन पर नीचे दिए गये प्रष्नो के उत्तर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी ने दिए-
नोट- महिलाओं के लिए हेल्प लाइन षुरू की गयी है जिस मे महिलाओं केप्रष्नों के उत्तर खातून आलेमा देेगीं इस लिए महिलाओं इस न0 पर संपर्क करें। न0 6386897124
षिया हेल्प लाइन में तमाम मराजए के मुकल्लदीन के दीनी मसायल जानने के लिए स्ुाबह 10 -12 बजे तक 9415580936- 9839097407 इस नम्बर पर संपर्क करें। एवं ईमेलः उंेंमस786/हउंपसण्बवउ पर संपर्क करें।
सवाल- क्या बेटे पर लाजिम है कि वह उस मर्जा की तकलीद करे जिस मर्जा की तकलीद उसके वालिद कर रहे हैं?
जवाब- बेटे पर खुद लाज़िम है कि वह शरायत के मुताबिक मर्जा-ए-तकलीद का इंतेखाब करे।
सवाल- अगर कोई शखस सूरज निकलने के बाद बेदार हो और कज़ा रोजा रखने का इरादा करे और उसने पानी पिया हो लेकिन यह न मालूम हो कि तुलू-ए-फज्र से पहले पिया था या बाद में पिया था, तो उसके रोजे का क्या हुक्म है?
जवाब- उसका रोजा सही होगा।
सवाल- रोजे की हालत में नाक में पानी डालने और कुल्ली करने से रोजा टूट जाएगा?
जवाब- वुजू से पहले नाक में पानी डालने और कुल्ली करने से रोजा नहीं टूटेगा।
सवाल- वह बीमार जिसने बीमार होने से पहले पूरे रमजान के रोजे की नियत की थी, उस मरीज के लिए क्या हुक्म है?
जवाब- क्योंकि बीमारी इत्तेफाकन है, लिहाजा वह रोजा छोड़ देगा और फिदया देगा।
सवाल- क्या कोई बेटा अपनी माँ को जकात दे सकता है?
जवाब- बेटे पर फर्ज है कि वह अपने वालिदैन का मुकम्मल ख़याल रखे, अलबत्ता जकात दी जा सकती है।
