अन्जुमने अत्फ़ाले हुसैनी ने विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित शिया पीजी कालेज में उठाया अलम-ए-सक़्क़ाए सकीना

अन्जुमने अत्फ़ाले हुसैनी ने शिया पीजी कालेज में उठाया अलम-ए-सक़्क़ाए सकीना

लखनउ 3 जुलाई। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सात मोहर्रम को विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित शिया पीजी कालेज में अन्जुमने अत्फ़ाले हुसैनी की जानिब से  मजलिस के बाद अलम-ए-सक़्क़ाए सकीना बरामद किया गया।पहले मौलाना  अब्बास नासिर अबाकाती ने मजलिस को ,िाताब किया बाद मजलिस अन्जुमने अत्फ़ाले हुसैनी की जानिब से  मजलिस के बाद अलम-ए-सक़्क़ाए सकीना बरामद किया गया  जिसमे  हजारों की संख्या में अज़ादाराने हुसैन ने अपने सीनों को पीटते हुए ग़में हुसैन में भीगी हुई आंखों के साथ या सकीना या अब्बास, या हुसैन या अब्बास अल अतश की सदाओं के साथ सदाओं के साथ मातम करते हुए अपना इज़हारे अक़ीदत पेश  किया।

जुलूस-हाए- अज़ा पर पावन्दी लगने से पूर्व उक्त अलम इमामबाड़ा नाजिम साहब की मजलिस के बाद स्व0 डा0 शहज़ादे इशरत की बिनाकर्दा अन्जुमने अत्फ़ाले हुसैनी की ओर से उठाया जाता था जो जुलूस की शक्ल में इमामबाड़ा नाजिम साहब से इमामबाड़ा आगा बाकर तक जाता था।

जुलूस में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के अलावा हाथी और उंट पर सवार बच्चे खाली कूजे हाथों में लेकर या अब्बास अल अतश की सदाओं के साथ मातम करते हुए चलते थे। जुलूसों पर पाबन्दी के कुछ समय बाद यह मजलिस शिया कालेज में होने लगी तब से यह अलम शिया पी0जी0 काॅलेज के कैम्पस से उठाया जाने लगा। कई वर्षों तक निरन्तर अन्जुमन की ओर से प्रषासन से इस शान्ति प्रिय जुलसू को पुनः उठाये जाने की अनुमति हेतु प्रार्थना पत्र देकर अनुरोध किया जाता रहा परन्तु हर बार प्रशासन द्वारा किन्ही कारणों से उसे अस्वीकार किया जाता रहा है। विगत कुछ वर्षों से शिया कालेज विक्टोरिया स्ट्रीट में मजलिस का समय बदलने के कारण यह अलम परिवर्तित समय पर शिया कालेज कैम्पस के गेट तक उठाया जाता रहा है। उसी परम्परागत तरीके से इस वर्ष भी अन्जुमन द्वारा अलमे मुबारक बरआमद किया गया तथा उक्त अलम में अक़ीदतमन्दों ने सीनाज़नी करके अपना नज़रानाए अक़ीदत पेश किया।