प्रेस विज्ञप्ति:
इमामबाड़ा जन्नत मआब सैयद तकी साहब अकबरी गेट लखनऊ में अशरए मुहर्रम की पांचवीं मजलिस को मौलाना सैयद सैफ अब्बास नकवी ने “अहलेबैत नजात का रास्ता” विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि अल्लाह ने रोज-ए-औल से जिस दीन की तहरीक के लिए एक लाख चौबीस हजार नबियों को दुनिया में भेजा, उसमें जो नबी आया, उसने दीन बताया, लेकिन जब नबी दुनिया से चला गया, तो उनके मानने वाले भी दीन को छोड़कर चले गए।
लेकिन जब आखिरी रसूल का दौर आया, तो लोगों ने सोचा कि वही अमल किया जाए कि पैगंबर के जाने के बाद हम भी अपने पुराने दीन की तरफ पलट जाएंगे। इसी लिए लोग दीन की तरफ आ रहे थे, लेकिन अल्लाह ने यह इंतजाम किया कि जिसके बाद कोई दीन से मुन्हरिफ न होने पाए।
इसके लिए खुदा ने पैगंबर को हुक्म दिया कि ऐ रसूल! आप उस चीज को पहुंचा दीजिए जो आपके रब की तरफ से आपको हुक्म दिया गया है। जिसके बाद पैगंबर ने सभी लोगों को जो आपके साथ आखिरी हज पर गए थे, जिनकी तादाद सवा लाख थी, को रोका और कहा कि जिस जिस का मैं मौला हूं, मेरे बाद फौरन उसके अली अलैहिस्सलाम मौला हैं।
इस ऐलान के बाद जो लोग सोच रहे थे कि रसूल के जाते ही हम अपने पुराने दीन की तरफ पलट जाएंगे, वे मायूस हो गए। अंत में मौलाना ने हज़रत ज़ैनब बिन्त अली अलैहिस्सलाम के दो नन्हें बच्चों हज़रत औन और मुहम्मद अलैहिमुस्सलाम का करबला में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम पर अपनी जान को कुर्बान करने के मसाइब बयान किए, जिसे सुनकर अज़ादारों ने ग़म और मातम किया।
मजलिस के बाद शबीह-ए-ताबूत हज़रत औन और मुहम्मद बरामद हुआ, जिसकी ज़ियारत कराई गई और तबर्रुक तौज़ी किया गया।
