चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर होंगे अधिकारियों के तबादले
तीन साल से एक जिले में तैनात अफसरों को हटाने की तैयारी, 30 नवंबर तक आयोग को भेजनी होगी रिपोर्ट
लखनऊ, संवाददाता। आगामी विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों की तैनाती और स्थानांतरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत निर्धारित अवधि में एक ही जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अधिकारियों को जिले से बाहर स्थानांतरित किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि इस संबंध में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को 30 नवंबर तक कार्रवाई की समेकित रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेजनी होगी।
निर्देशों के अनुसार, पिछले चार वर्षों के दौरान जिन अधिकारियों ने 31 मई 2027 तक एक ही जिले में तीन वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर ली होगी, वे स्थानांतरण नीति के दायरे में आएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना और किसी भी तरह के पक्षपात की आशंका को दूर करना है।
प्रशासन से लेकर पुलिस विभाग तक लागू होंगे निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि स्थानांतरण नीति के दायरे में जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी, सहायक रिटर्निंग अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, संयुक्त मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी सहित निर्वाचन कार्यों से सीधे जुड़े समान रैंक के अधिकारी शामिल हैं।
यह निर्देश मंडलायुक्तों, नगर आयुक्तों तथा नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में कार्यरत संबंधित अधिकारियों पर भी लागू होंगे। पुलिस विभाग में उप निरीक्षक और उनसे वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा आबकारी विभाग के उप निरीक्षक तथा समान रैंक के अधिकारियों और परिवहन विभाग के उप निरीक्षक एवं उनसे वरिष्ठ क्षेत्रीय अधिकारियों को भी इसके दायरे में रखा गया है।
गृह जिले और पूर्व तैनाती वाले क्षेत्र में नहीं मिलेगी पोस्टिंग
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक, संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अधिकारियों की तैनाती उनके गृह जिले में न हो। इसके साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन अधिकारी, सहायक निर्वाचन अधिकारी और पुलिस निरीक्षक, उप निरीक्षक सहित उनसे वरिष्ठ अधिकारियों को उस विधानसभा क्षेत्र या जिले में दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा, जहां वे पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव के दौरान तैनात थे।
हालांकि, राज्य मुख्यालयों में तैनात संबंधित विभागीय अधिकारियों, निर्वाचन कार्य से असंबद्ध तकनीकी कर्मियों तथा सेक्टर अधिकारी और जोनल मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात अधिकारियों को सामान्यतः इन निर्देशों से छूट दी गई है।
सेवानिवृत्ति के नजदीक अधिकारियों को राहत
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि 31 मई 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को स्थानांतरण नीति से छूट दी जाएगी। हालांकि, ऐसे अधिकारियों को निर्वाचन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों का प्रभार नहीं सौंपा जाएगा। छूट प्राप्त अधिकारियों के कामकाज पर भी निगरानी रखी जाएगी, ताकि वे अपने दायित्वों का निर्वहन निष्पक्ष और पक्षपात रहित तरीके से करें।
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत संबंधित विभागों को तय समयसीमा में स्थानांतरण संबंधी कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इससे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक व्यवस्था को निष्पक्ष बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
