अमेरिका-चीन के बीच हथियारों की होड़ तेज, इंडो-पैसिफिक में बढ़ा सैन्य तनाव
वॉशिंगटन/बीजिंग। विश्व की दो सबसे बड़ी सैन्य शक्तियों अमेरिका और चीन के बीच हथियारों की होड़ लगातार तेज होती जा रही है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, दक्षिण चीन सागर और ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। दोनों देश आधुनिक लड़ाकू विमानों, लंबी दूरी की मिसाइलों और अत्याधुनिक बमवर्षक विमानों के विकास में तेजी से जुटे हुए हैं।

हाल ही में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की वायुसेनाओं ने ऑस्ट्रेलिया में संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डायमंड स्टॉर्म’ आयोजित किया। इस अभ्यास में अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर की भागीदारी को चीन के लिए रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। यह बमवर्षक रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता और 11 हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक उड़ान भरने के साथ पारंपरिक और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
दूसरी ओर चीन भी अपनी सैन्य शक्ति को लगातार मजबूत कर रहा है। चीन लंबी दूरी की मिसाइलों, आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और नए लड़ाकू विमानों के विकास पर तेजी से काम कर रहा है। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता को देखते हुए अमेरिका अपने नए F-47 छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान और लंबी दूरी की स्टैंड-ऑफ मिसाइल परियोजना को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सामरिक बढ़त बनाए रखी जा सके।
विश्लेषकों का कहना है कि दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र आने वाले समय में अमेरिका और चीन की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के प्रमुख केंद्र बने रहेंगे। हालांकि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष युद्ध की स्थिति नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ती सैन्य तैयारियां, युद्धाभ्यास और आधुनिक हथियारों की तैनाती क्षेत्रीय तनाव को और अधिक बढ़ा सकती है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर दोनों महाशक्तियों की अगली रणनीतिक चाल पर टिकी हुई है।
