कुरान मजीद का हिफ्ज करना खुदा की बहुत बड़ी नेमत मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली
(सत्ता की शान)
लखनऊ, 20 फरवरी। खुदा की आखिरी किताब कुरान पाक को हिफ्ज करना बहुत बड़ी नेमत हैं। इस किताब को समझना, उसके आदेश पर अमल करना और उसकी शिक्षाओं के अनुसार जिन्दगी गुजारना एक मुसलमान को जन्नत का हकदार बनाता है। इन विचारों को नाजिम दारूल उलूम फरंगी महल मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली इमाम ईदगाह लखनऊ ने जाहिर किया। वह आज दारूल उलूम फरंगी महल के सलाना जलसा दस्तारबन्दी में अध्यक्षीय सम्बोधन कर रहे थे। उन्होने कहा कि यह दारूल उलूम अल्लामा निजामुद्दीन फरंगी महली बानी दसें निजामी 1701 में अपनी कयामगाह फरंगी महल में कायम किया था। यह देश का पहला मदरसा घोषित किया गया। वालिद मरहूम मौलाना अहमद मियों फरंगी महली रह० ने जनवरी 2001 में उसकी दोबारा स्थापना की। मौलाना फरंगी महली ने कहा कि ईमान व अकीदे की हिफाजत और इस्लामी शरीअत की तालीम के लिए मदरसों का वुजूद बहुत जरूरी है। उन्होने मदरसों के अध्यापकों और संचालकों की प्रशंसा की वह अपने सीमित साधन के साथ इस्लामी शिक्षा को आम करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
उन्होने कहा कि उलमा-ए-फरंगी महल के शैक्षिक मिशन को पूरा करने के लिए दारूल उलूम के साथ साथ शाहीन एकेडमी भी सरगरम अमल है जिसमें अन्य छात्रों के साथ साथ हाफिज को भी दीनी शिक्षा देने की व्यवस्था है। मौलाना मो० मुश्ताक ने जलसे में कुरान पाक की अजमत व फजीलत पर बहुत ही ईमान अफरोज तकरीर की। उन्होने कहा कि अन्य शिक्षा के मुकाबले में कुरान पाक को हिफ्ज करना एक ऐसा विशेष अमल है जो केवल खुदा पाक की खुशी हासिल करने के लिए किया जाता है। मुफ्ती अतीकुर्रहमान अध्यापक दारूल उलूम ने कुरान पाक, हदीस ओर सीरत नबवी सल्ल० के हवालों से खिताब किया। उन्होने कहा कि जो वालिदैन अपनी औलाद को कुरान पाक का हाफिज कराते हैं खुदा पाक उनको कयामत के दिन पैसा चमकता हुआ ताज पहनायेगा जिसकी रौशनी सूरज से भी ज्यादा तेज होगी। मो० इस्माईल की तिलावत से जलसे का आरम्भ हुआ। नात पाक कारी कमरूद्दीन ने पेश की। जलसे का संचालन कारी मो० हारून ने किया। इस अवसर पर 2025 में हिफ्ज कुरान मुकम्मल करने वाले कई छात्रों की दस्ताबन्दी मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने की। इन छात्रों को सनदें भी दी गयीं और अन्य छात्रों को वार्षिक रिपोर्ट कार्ड भी दिये गए। जलसे में छात्रों के वालिदैन, सरपरस्त हजरात जिनमें औरतें भी शामिल थीं और गढ़मान्य व्यक्ति बड़ी संख्या में शरीक हुए।