वक्फ संशोधन बिल से उम्मीद नहीं बल्कि मायूसी हुई मौलाना खालिद रशीद

वक्फ संशोधन बिल से उम्मीद नहीं बल्कि मायूसी हुई मौलाना खालिद रशीद

मुसलमानों को अदालत से इंसाफ की पूरी उम्मीद है

लखनऊ, 02 अप्रैल। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली इमाम ईदगाह लखनऊ ने कहा कि लोक सभा में वक्फ संशोधन बिल पश किया गया। इससे बड़ी मायूसी हुई है और असल में जितना भी संशोधन किया गया है वह वक्फ के लाभदायक नही बल्कि नुकसानदह हैं। अफसोस की बात यह है कि ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य संस्थाओ ने जो सुझाव जे०पी०सी० के सामने रखे थे उन को इस बिल में शामिन ही नहीं किया गया। और जिस तरीके से वक्फ काउन्सिल और बोर्ड में 4 गैर मुस्लिम सदस्यों को शमिल करने की बात कही गयी है जब कि किसी भी दूसरे धार्मिक ट्रस्ट या संस्थाओं में कानूनी तौर पर दूसरे धर्म का व्यक्ति शामिल नही हो सकता। यह अपने आप में बड़ी नाइंसाफी है।

उन्होने कहा कि 90 प्रतिशत से अधिक वक्फ मस्जिदों, कब्रिस्तानों और दरगाहों की शक्ल में है इसके बावुजूद भी यह कहना कि धार्मिक मामला नही है। यह अपने आप में एक अचम्भे की बात है। उन्होने कहा कि वक्फ बिलइस्तिमाल के खत्म किये जाने से बहुत सी वक्फ सम्पत्तियों को नुकसान पहुंच सकता है।मौलाना ने कहा कि जो बिल पेश किया गया है इस में इस फलास को शामिल करना कि किसी भी नौमुस्लिम को यह साबित करना कि वह 05 साल से मुसलमान है तब ही वह प्राप्रटी वक्फ कर सकता है। यह देश के संविधान की धारा 26 के खिलाफ है। मौलाना फरंगी महली ने कहा जो बिल पेश किया गया है इसमें इस बात को भी शामिल किया गया है कि वक्फ बोर्ड में सदस्यों का चयन सरकार करेगी जबकि अभी तक इलेक्शन के माध्यम से सदस्यों को चयनित किया जाता था। एक सेक्युलर देश मे एक सेक्युलर तरीके से बनाये जाने वाले लोग नामजद बोर्ड की शक्ल दी जा रही है जो कि अपने आप में गैरसंविधानिक कार्य है। उन्होने का कि इस बिल में बोर्ड में औरतों को शामिल करने की बात की गयी है जबकि मौजूदा वक्फ एक्ट में पहले से ही औरतों को शामिल करने की बात कही गयी है।

उन्होने कहा कि अगर बिल लोक सभा और राज्य सभा से पास हो जाता है तो भी हमारे लिए अदालत का दरवाजा खुला है और हमें पूरी उम्मीद है कि अदालत से हमें इंसाफ मिलेगा क्योंकि उनमें से कई कानून संविधान की धारा 14, 25, 26 और 29 के खिलाफ है।